वनमाली केन्द्र की गोष्ठी में कवियों ने जिंदगी की विसंगतियों व आदमी की पीड़ा को व्यक्त किया

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डॉ मिर्जा कवर्धा
कवर्धा। वनमाली सृजन केन्द्र एवं पाठक मंच की एक बैठक और कविगोष्ठी 22 दिसंबर शुक्रवार की शाम सर्किट हाउस के अशोक हॉल में संपन्न हुई। सुधी पाठक सोम वर्मा की मौजूदगी में कविता पाठ की शुरुआत करते हुए युवा कवि सात्विक श्रीवास्तव ने लड़की होने की नियति को बड़ी ही खूबी से व्यक्त किया। संतराम थवाईत ने कॉलोनी कल्चर में आदमी की गुम होती पहचान को कविता में ढाला। रमेश चौरिया ने जिंदगी की विसंगतियों को चित्रित किया। समयलाल विवेक ने चित्रात्मक कविताओं के जरिए गांवों में बसर करनेवाले निचले तबके के लोगों की पीड़ा को स्वर दिया। पुष्पांजलि नागले सुमधुर आवाज़ में प्रेमगीत और नववर्ष पर ग़ज़ल पढ़ी।अजय चन्द्रवंशी ने सियासती धक्का-मुक्की पर व्यग्यं कविता सुनाई। नीरज मंजीत ने गुलाम अली की आवाज़ और हसरत मोहानी के लफ़्ज़ों को बड़ी ही खूबसूरती से सधी हुई उर्दू में नज़्म में चित्रित किया। महेश आमदे ने स्थानीय मित्रों की पुरातात्विक रचनाओं का उल्लेख करते हुए भोरमदेव का चित्र खींचा। भागवत साहू ने गुरू घासीदास के विचारों का बखान किया। सुखदेव सिंह अहिलेश्वर ने गुरू घासीदास के समन्वय वादी और किसान मजदूरों की पक्षधरता का उल्लेख किया। आखिर में नीरज मनजीत ने भोपाल में चल रहे वनमाली विश्वरंग की जानकारी दी। समयलाल विवेक ने छत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के भावी आयोजन के बारे में बताया।