भोरमदेव ऐतिहासिक स्थान का शासकीय जमीन का निजीकरण का खेल.. सब खेल को जानते हैं अधिकारी फिर भी मौन धारण किए हुए?

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डॉ मिर्जा कवर्धा
भोरमदेव ऐतिहासिक स्थान का शासकीय जमीन का निजीकरण का खेल..
कवर्धा छत्तीसगढ़ के खजुराहों के नाम से विख्यात भोरमदेव मंदिर के शासकीय जमीन को आदिवासी के नाम पर पट्टा और फिर उस जमीन को करोड़ों रुपए में सामान्य वर्गों के नाम पर बेचने का किया जा रहा है। रसूखदार लोग अपने ताकत का उपयोग करते हुए भोरमदेव मंदिर परिसर के आस पास, मड़वा महल के पास और छेरकी महल के बाजू में शासकीय जमीन को आदिवासी लोगों के नाम पर दिया गया उसके बाद उक्त जमीन को कलेक्टर द्वारा परिमिशन देकर सामान्य वर्गों के नाम पर किया गया है।
भोरमदेव पर्यटन स्थल का जमीन इस तरह से करोड़ों रुपए लेन देन का खेल चल रहा है।
इस खेल में राजस्व विभाग के नीचे से उच्च अधिकारी और बड़े रसूखदार नेता लोग जुड़े हुए है।
जिला प्रशासन को अपने संज्ञान लेने की आवश्यकता है और इस खरीदी बिक्री के अंदर के खेल को जांच करने की भी आवश्यकता है क्योंकि बहुत से लोगों ने फर्जी परमिशन लेकर सामान्य कराकर उस जमीन में अच्छा खासा मोटा रकम कमाकर आज उसी जमीन से कई करोडो के मालिक हो गए है … ये पब्लिक है सब सब जानती है.. क्योंकि पूर्व कलेक्टर ने भोरमदेव मंदिर के आसपास जमीनों के खरीदी-बिक्री पर लगाया था पाबंदी
क्या डिप्टी सीएम इस बात को अपने संज्ञान में लेंगे ?