बिग ब्रेकिंग – कबीरधाम पुलिस की एक अहम पहल को मिली बड़ी सफलता .. 100 से अधिक विद्यार्थी जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह जिन्हे अनुसूचित जनजातियों में सबसे कमजोर के रूप में पहचाना जाता है, कबीरधाम पुलिस के प्रोत्साहन से 10वी एवं 12वी के परिणाम में सफल हुए .. पास हुए विद्यार्थियों में एक खास नाम दिवाकर उर्फ लिबारू कोररम का भी है जो सरेंडर से पूर्व माओवादी संघटनो में शामिल रहा और जिसपे 14 लाख का इनाम भी रखा गया था .. एस पी अभिषेक पल्लव ने सभी माओवादियों से हिंसा छोर सरेंडर करने की अपील की और साथ ही सरकार की पुनर्वास नीतियो का लाभ उठाने को कहा ..

Editor In Chief
डॉ मिर्जा कवर्धा
कवर्धा : कबीरधाम पुलिस की सराहनी पहल से बड़ी सफलता सामने आई है जिसमे 100 से अधिक विद्यार्थी जो की PVTG समूह – विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह जिन्हे अनुसूचित जनजातियों में सबसे कमजोर के रूप में पहचाना जाता है, सुदूर वनांचल वन ग्रामों में जो निवासरत है और साथ ही यह सभी स्कूल ड्रॉपआउट रहे है जिन्हें कबीरधाम पुलिस ने प्रोत्साहित किया, शिक्षा के लिए जागरूक किया और परिक्षा में बैठने के लिए प्रेरित किया वही हाल ही में आए परिणामों में यह सभी विद्यार्थी 10वी एवं 12वी के परिणामों में पास हुए ।
कबीरधाम पुलिस की यह पहल सराहनी है और साथ ही इन विद्यार्थियों के भविष्य में विशेष महत्व रखती है वही एस.पी. पल्लव ने एक खास किस्सा साझा किया जो एक माओवादी जोड़े का है जिसमे यह साफ जाहिर हो रहा है की कैसे बंदूक के आगे कलम की जीत हुई ..
बड़ी खबर यह है की इन विद्यार्थियों में जिन्हे सफलता मिली एक बड़ा नाम ऐसे व्यक्ति का है जो पूर्व में प्रख्यात माओवादी रह चुका है और जिसपे 14 लाख की इनाम राशि भी रखी गई थी, यह बड़ा नाम दिवाकर उर्फ लिबारू कोररम का है जो अबूझमाड़ बस्तर का निवासी है और साल 2021में दिवाकर ने सरेंडर किया था ।
दिवाकर उर्फ लिबारु कोररम ने हाल ही में आए परीक्षा के परिणामों में 10वी कक्षा 35% से पास किया और आपको बता दे की यह परिणाम अपने आप में ही बहोत महत्वपूर्ण है और साथ ही इसकी सराहना भी होनी चाहिए क्योंकि दिवाकर ने कक्षा पहली में ही स्कूल छोड़ दिया था और 14 साल के अंतराल/गैप के बाद दिवाकर ने अपनी तैयारी की और आज वे सफल हुए ।
आपको बता दे की दिवाकर इससे पूर्व 2 बार 10वी की ओपन परीक्षा में असफल रहे लेकिन वे डटे रहे और दिवाकर ने अपनी मेहनत और मजबूत इरादों से अपने तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त कर ही ली ।
दिवाकर की पत्नी लक्ष्मी जिसने दिवाकर के साथ ही सरेंडर किया था जो स्वम भी माओवादी रह चुकी है और जिसपे भी 8 लाख का इनाम रखा गया था लक्ष्मी भी तीन विषयों में पास हुई और 2 विषय में सप्लीमेंट्री आए ।
कबीरधाम एस.पी. डॉ अभिषेक पल्लव ने यह खास जानकारी साझा की जिसपे उन्होंने कहा की यह जोड़ा एक बड़ा उधारण है जिसमे बंदूक के आगे कलम की जीत हुई और वही एस.पी. पल्लव ने सभी माओवादी से अपील की वे हिंसा का त्याग करे और सरेंडर करके सरकार की पुनर्वास नीतियो का लाभ उठाए ..