कबीरधाम (कवर्धा)छत्तीसगढ़

27वां रोजा हुआ पूरा, अब ईद की तैयारी जोरों पर

तपती गर्मी में भी रोजा रखकर की जा रही इबादत

Editor In Chief

डॉ मिर्जा कवर्धा

इन दिनों रमजान का पाक महीना चल रहा है न केवल बड़े बल्कि बच्चे भी रोजा रखकर अल्लाह की इबादत पूरे तन मन से कर रहे हैं. माहे रमजान में मुस्लिम भाई रोजा रखकर ख़ुदा की इबादत में लगे हुए प्रोग्राम भी हो रहा है. रोजेदारों का कहना है कि इस्लाम आपसी भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम देता है. एक साथ बैठकर इफ्तार करने से आपसी भाईचारा और मजबूत होता है.

मस्जिदों में विशेष नमाज पर अभी भी अदा की जा रही है. रमजान के चलते मुस्लिम भाई इबादत में अपना अधिक से अधिक समय लगा रहे हैं. इस्लाम में रोजा की अपनी अहमियत है. इबादत का खास महीना है, ईद के मुबारक महीने में अल्लाह के बंदे अपने रब का इनाम पाने के लिए इबादत करते हैं. 11 महीने मस्जिद से दूर रहने वाले बड़े से बड़े गुनाहगार भी अल्लाह के घर पर अपने सजदों के नजराने पेश करते नजर आते हैं।

ईद के लिए सजा बाजार:

उल्लेखनीय है माहे रमजान का 27वाँ रोजा भी हो चुका है. बाजारों में ईद की रौनक दिखने लगी है कपड़े सेवइयां व खासतौर से रंग बिरंगी टोपियो की दुकानें सज गई है. दुकानों पर ग्राहकों की चहलकदमी भी बढ़ गई है. ईद के लिए अब मात्र 3 दिन शेष रह गए हैं। बाजार पूरी तरह से अपने शबाब पर है। कवर्धा के बाजारों में रोजेदार अपने-अपने हैसियत के हिसाब से दुकानों में खरीदारी करते नजर आ रहे है।

जगह-जगह इफ्तार का हो रहा प्रोग्राम:

रमजान के मुबारक महीने में इफ्तार का दौर भी शुरू हो गया है, मस्जिदों के अलावा मुसलमान भाइयों के घरों में इफ्तार का प्रोग्राम चल रहा है. इसमें बड़ी तादाद में मुस्लिम भाई शामिल हो रहे हैं. रोजेदारों का कहना है कि इफ्तार के समय खुदा से मांगी गई दुआ जरूर कबूल होती है. एक साथ इफ्तार ख़ुदा हम सबको एक और नेक बनाकर रखते हैं।

तराबी में उमड़ रही भीड़:

रमजान के पाक महीने के चलते शहर के साथ जिले के सभी मस्जिदों में मुस्लिम धर्मावलंबियों की भीड़ सुबह से शाम विशेष नमाज अदा करने उमड़ रही . तराबी के वक्त तो मजमा लगा रहता बैग व महबूब खान ने बताया कि रमजान के दौरान बच्चों की खुशी देखने लायक होती है वह भी बड़ों की तरह ही रोजा रखते हैं और सभी के सलामती के लिए अल्लाह से दुआ मांगते हैं. इस माह के इंतजार खासतौर पर बच्चों को ज्यादा रहता है।

जकात देकर गरीबों की कर रहे मदद:

रमजान के मुबारक महीने में आर्थिक रूप से संपन्न मुस्लिम भाई खैरात और जकात भी अदा कर रहे हैं दान पुण्य करना दुनिया के सभी धर्मों में लिखा हुआ है इसलिए हर मजहब के लोग खास खास मौकों पर सदका खैरात करते है सबका अपना नजरिया व अकीदा है. मौलाना ने बताया कि इस्लाम में खैरात और जकात को इबादत व सवाब का दर्जा दिया गया है. इसी मकसद के लिए तो इस्लाम में जकात फर्ज की गई है, ताकि कौम के मालदार हजरात अपने कौमी, दीनी गरीब भाईयों की मदद करके उन्हें भी इज्जत व सुकून की जिंदगी जीने का मौका देते रहे।

News Desk

Editor in chief, डॉ मिर्जा कवर्धा

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