कबीरधाम (कवर्धा)छत्तीसगढ़

शंकराचार्य हेलीकॉप्टर से पधारे कवर्धा, धर्मध्वज को किया नमन, गणेशपुरम में दिव्यदर्शन दे दिया आशीर्वचन

Editor In Chief

डॉ मिर्जा कवर्धा

 

कबीरधाम। परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ दो दिवसीय प्रवास पर आज कवर्धा आगमन हुआ है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी अशोक साहू ने बताया पूज्यगुरुदेव भगवान रविवार को सुबह 8:50 बजे बटालियन ग्राउंड भिलाई से हेलीकॉप्टर में 9:30 बजे मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिला स्थित झोतेश्वर धाम पहुँचे जहा आयोजित समराधना कार्यक्रम में शामिल हो केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल के निजनिवास पहुँच उन्हें दर्शन दे आशीर्वाद दिया ततपश्चात 12:40 बजे परमहंसी हेलीपेड पहुँच कवर्धा के लिए उड़ान भरे। पूज्यगुरुदेव 1:30 बजे कवर्धा के आकाश में दर्शन दे रहे थे वही पूज्यगुरुदेव ने हेलीकॉप्टर से पूरे कवर्धा की परिक्रमा कर 1:35 बजे कवर्धा के पीजी कॉलेज मैदान में हेलीकॉप्टर उतरा जहा उमंग पांडेय के नेतृत्व में युवाओ ने बाइक रैली निकालकर भव्य स्वागत किए।

धर्मध्वज चौक पहुँच विशाला धर्मध्वज को किए नमन

 

शंकराचार्य की रैली धर्मध्वज चौक पहुँचा जहा पूज्यगुरुदेव वाहन से उतरकर सड़क पर खड़े हो धर्मध्वज को नमन कर आगे बढे युवाओं ने जय जय श्रीराम का नारा लगाते हुए आयोजन स्थल पहुँचे।

गणेशपुरम के धर्मसभा मंच से भक्तो ने शंकराचार्य का किया दर्शन 

दोपहर 2 बजे शंकराचार्य जी महाराज बिलासपुर रोड स्थित गणेशपुरम पहुँचे जहा गणेश तिवारी सपरिवार सहित परंपरा अनुसार पदुकापुजन किए। ततपश्चात परमहंसी से आए ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानंद ने प्रवचन पूर्व बिरुदावली का बखान किया।

गागर में सागर’ जैसा उदाहरण गणेश तिवारी जी का घर – शंकराचार्य महाराज

शंकराचार्य महाराज ने भक्तों से कहा कि सभी शोभायात्रा के लिए सुबह से आए हुए हैं, जो आपके धैर्य की परीक्षा है। यह उचित नहीं है कि आपको और अधिक इंतजार कराया जाए। इसलिए केवल औपचारिकता का निर्वहन करते हुए हम अपनी बात आपके सामने रख रहा हूँ आगे आगे और अवसर होगा तो फिर आप से चर्चा होगी।

कवर्धा में सनातन धर्म के ध्वज को जब लगाया गया था तब कवर्धा को धर्म नगरी कहा जाने लगा। कवर्धा धर्म-नगरी तो है लेकिन लोग अब छत्तीसगढ़ सनातन धर्म की राजधानी के रूप में जानते हैं वह जो धर्म राजधानी की कल्पना थी आज हम देख रहे हैं। गणेश तिवारी और सहयोगियों ने मिल कर पूरे कवर्धा को ऐसा स्वरूप दे दिया हैं।

अब अगले दिन जो भी बचे हैं कवर्धा धर्म राजधानी के रूप में जाना जाएगा। यह गणेश तिवारी का उदार हृदय हैं। घर उन्होंने बनाया तो पूजा और पाठ करके प्रवेश कर सकते थे लेकिन उन्होंने यह उचित नहीं समझा कि मैं अकेले परिवार के साथ घर में प्रवेश करूं। उन्होंने सोचा यह पूरा क्षेत्र मेरा घर हैं। सबके साथ मैं अपने घर में प्रवेश करूँगा।

हम सभी ने एक कहावत सुनी थी और वह यह थी कि गागर में सागर …. हम सोचते रहते थे यह कैसी कहावत है? सागर कितना बड़ा होता है। गागर कितनी छोटी होती है। गागर में सागर कैसे समा सकता है ? हो ही नहीं सकता लेकिन आज हम देख रहे हैं किसारा क्षेत्र एकजुट होकर के गणेश तिवारी के साथ उनके छोटे से घर में प्रवेश कर रहा और सब समाये चले जा रहे हैं। गागर में सागर चला जा रहा हैं और गागर में फिर भी कमी नहीं हैं।

हमारे भारतीय संस्कृति की विशेषता है यहां गागर में सागर हो जाता है। यहां पुष्पक विमान में यदि कोई बैठने आता है तो जितने बैठने वाले होते हैं उतने ही जगह हो जाती है कम नहीं होती। ऐसे ही तो गणेश तिवारी ने अपना भवन निर्मित किया निर्मित करके उसमें प्रवेश करा और आज देखो आज आप सब हजारों की संख्या में सम्मिलित होकर उनके घर में उनके साथ प्रवेश कर रहे हैं और आप ही क्या यहां पर, तो महायज्ञ हो रहा। यहां आचार्यों ने समस्त देवी देवताओं का आह्वान किया हुआ हैं। वह सब पधारे हुए यह स्थान बैकुंठ लोक, कैलाश लोक से कम नहीं है, जहां पर भगवान का साक्षात सानिध्य हैं।

हम लोग यहां पर आ कर के बैठे हैं, तो तो अलग प्रकार की ऊर्जा हो रही है और यह अनुभव अगले महीने जो कार्यक्रम है। उस तक विद्यमान रहने वाला है उनके पूर्वज ब्राह्मण के साक्ष्य साध्य हो गए थे। उनका उद्धार करने के लिए तपस्या कर ले आए। बड़ी तपस्या की तब गंगा जी धरती पर आई लेकिन हम बिना तपस्या के उनका लाभ ले रहे हैं ऐसे गणेश तिवारी ने बड़ी तपस्या की है बड़ा परिश्रम किया है रात दिन काम किया होगा तब कुछ धन संपत्ति एकजुट कर पाएं होंगे आज उनसे धन संपत्ति का उपयोग करके, उन्होंने यहां पर सभी श्रोताओं को आमंत्रित किया। ऋषियों महाऋषियों को आमंत्रित कर दिया, साधु संतों को आमंत्रित किया, सज्जनों को आमंत्रित किया। इसका लाभ बिना कोई खर्चा किए जैसे गंगा का लाभ मिला वैसे इस वातावरण का लाभ हमें मिल रहा हैं।

हम तो यही कहना चाहेंगे कि आप इस अवसर को छोड़िए मत। यह मत सोचिए कि यार फिर देखा जाएगा ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते हैं आप इसका पूरा लाभ उठाइए यह जो लाभ मिल रहा यहां आकर पुण्य का लाभ उठाएं व गणेश तिवारी जी को आपका योगदान होगा आपके दोनों हाथों में लड्डू है। इस अवसर का निश्चित रूप से लाभ लेना चाहिए आप सब समय भी जाने पर पछताने का काम नहीं करेंगे, बल्कि कार्यक्रम का लाभ लेंगे यही आशा करता हूँ।

इस अवसर पर ज्योतिर्मठ के सीईओ चंद्रप्रकाश उपाध्याय, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, ब्रह्मचारी परमात्मनांद, ब्रह्मचारी हृदयानंद, ब्रह्मचारी केशवानंद, ब्रह्मचारी मुक्तानंद, ब्रह्मचारी योगानन्द, राकेश पांडेय, कमलेश कुकरेती, अरुण दीक्षित, योगी, पूर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी, रघुराज सिंह ठाकुर, राम कुमार भट्ट, सन्तोष पटेल, वीरेंद्र साहू, जयराम साहू सहित हज़ारो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

News Desk

Editor in chief, डॉ मिर्जा कवर्धा

News Desk

Editor in chief, डॉ मिर्जा कवर्धा

संबंधित आलेख

Back to top button
error: Content is protected !!