आदिमजाति कल्याण विभाग कर्मचारी संघ की 3 सुत्रीय मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को सौंपा ज्ञापन।

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डॉ मिर्जा कवर्धा
कबीरधाम जिले के आदिमजाति कल्याण विभाग में कार्यरत 261 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने 3 सुत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है. इसे लेकर आज कर्मचारी संघ के लोगों ने राज महल चौक स्थित राजीव गांधी पार्क में एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया जिसके बाद रैली निकाल कर कलेक्टर कार्यकाल पहुंचे जहां संघ ने मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है. साथ ही प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जल्द ही मांग पुरी नही होता है तो छत्तीसगढ़ प्रदेशभर के कर्मचारी राजधानी रायपुर में एक साथ बड़े स्तर में धरना प्रदर्शन कर आंदोलन करेंगे जिसकी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।
क्या है मांग।
1.स्वीकृत पदों के विरूद्ध कार्यरत समस्त कर्मचारी जैसे कलेक्टर द्वारा आदेशित कर्मचारी, सहायक आयुक्त द्वारा आदेशित अनुमति ज्ञापन पंचायत प्रस्ताव, मेरा संचालन हेतु अनुपय प्राप्त गौखिक दैनिक सभी कर्मचारियों जैसे रसोईया, जलवाहक, चौकीदार पूर्ण कालिक सफाई, पूर्ण कालिक स्वेच्छक कर्मचारी, तीघी भर्ती आदि को आकस्मिक निधि में पूर्व आदेश के आधार पर समायोजन कर वेतन निर्धारण करने एवं सीधी भर्तिया रद्द करें।
2. विभाग में कार्यरत नियमित कर्मचारियों के लिए नवीन पद सहायक अधीक्षक सृजित करें या फिर अधीक्षक श्रेणी दर पर भर्तिया पर 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पर पदोन्नति प्रदान करने तक नवीन भर्तियां पर रोक लगाए।
3. विभाग में कार्यरत समस्त कर्मचारी के लिए अन्य विभागों की तरह शासकीय अवकाश दिये जाऐ या फिर तेरह माह का वेतन भुगतान किया जाए।
इन्हीं तीन मांगों को लेकर कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप।
स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति कल्याण विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम छात्रावास एक दूसरे के पूरक हैं, स्कूल के कर्मचारियों का अवकाश तो मिल जाता है, लेकिन छात्रावासों के कर्मचारियों को नहीं मिलता, अवकाश की सुविधा नहीं दी जाती है. कर्मचारी चुपचाप कार्य करते रहे, अत्यधिक दबाव होने तथा किसी प्रकार से अन्य कोई सुविधाएं ना मिल पाने के कारण मानसिक आर्थिक, शारिक रूप से कुंठित तथा आक्रोशित है.
शासन द्वारा छात्रावास एवं आश्रमों के छात्रों के लिए अध्ययन कार्य हेतु 10
महिने का स्वीकृत आदेश जारी करते है लेकिन छात्र वर्ष भर रहते ऐसे में कर्मचारी की डिय्टी साल भर 24 घंटे का हो जाता है. साथ ही मनगढ़ंत इमोशनल ब्लेकमेल कर उनसे कार्य लिया जाता है. समस्त शासकीय नियमों का सहायक कार्यालय स्तर से खुलकर उल्लंघन किया जा रहा है. वही ग्रीष्मकालीन मे कर्मचारी अगर दैनिक वेतन भोगी है तो उनको कार्य से बैठा दिया जाता है, जोकि कर्मचारियों के साथ छलावा है. कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि अगर मांग पुरी नही होती है तो प्रदेश स्तर आंदोलन करेंगे जिसकी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।