छत्तीसगढ़राजनांदगांव

आज के दौर मे नाटक के एक कलाकर के रूप मे नेताओं का भाषण को डायलाग समझ कर मजा लेते है मतदाता?

छुरिया से अकिल मेमन की रिपोर्ट 

छुरिया ;- एक समय था जब नेताओं कोई बड़ा नेता मंत्री सासद विधायक जब कोई गाँव पहुचते थे तब ग्रामीण स्वंम अपने मर्जी से गाव के अतिम छोर पहुंच उनका ढोल बजा से स्वागत कर मंच तक लेकर आते थे बैगर किसी तामझाम के घन्टों उनका काम का बात वाले भाषण को लोग सुनते भी थे वर्तमान के राजनीति मे ठीक उलटा हो गया अब नेताओं का जनता अपने मर्जी से नहीं बल्कि आने वाले नेताओं के पैकेज के हिसाब से स्वागत सत्कार करते है ,नेताओं को प्रयोजित अपने समर्थकों के माध्यम से अन्दर से सारा व्यवस्था कराते है ,तब जाकर भीड़ होता है और कुछ लोग उनकाआगवानी करते है ,उसके बाद चलता है, भाषणो का दौर उस वक्त हर नेता इस भ्रम मे रहता है उन्हें मन से सुन रही है जनता को हम बड़ी बड़ी बाते वादे कर उन्हें गुमराह कर रहे है मगर सच्चाई कुछ और होता है गाँव के ग्रामीण ठीक एक नाटक के रूप मे इसका मजा लेते है मंच मे कलाकरआकर डायलॉग मारते है, तब तालियां से उनका हौसला बड़ाया जाता है ,ठीक उसी तरह आज का राजनीति है ,जनता नेता को और नेता जनता को बेवकूफ समझ रही है।

शादी हो या राजनीतिक आयोजन एक ही मंच मे दर्जनों नेताओं का स्वागत

अक्सर चुनाव के पहले नेता हर स्तर पर मतदाताओं के लिए कटपुतली बनकर उपयोग होते है, राजनित मे यह बात हर व्यक्ति समझता है, नेताओं का चुनाव के समय हर जनता हर स्तर पर अपना डिमांड पूरा करा लेता उन्हें तो मालूम होता है,चुनाव के बाद उनका क्या दशा होना है ,इसे बताने का जरूर नहीं है ,वर्तमान मे ग्रामीण क्षेत्र के लोग इतने होशियार हो गए है ,वे अपने समाज या रिस्तेदार को भूल कर राजनीतिक पार्टी के छोटे बड़े नेताओ को शादी हो या अन्य आयोजन टूर्नामेंट या संस्कृति कार्यक्रम मे विषेश तौर पर कार्ड देकर उन्हें बुलाते है ,बकायदा कुछ आयोजन मे निमंत्रण कार्ड मे उनको अतिथि बनाने नाम छपवाने चन्दा भी लिया जाता है, फीर क्या है. गाँव मे जब नेता पहुचते है उसका भव्य स्वागत फोटो का रस्म पूरा कर उन्हें रवाना करते है ,तब दूसरा नेता वेटिंग मे होता है ,उनके पहुचने पर उनका भी उसी तर्ज पर स्वागत कर जनता अपना स्वार्थ पूर्ती कर उन्हें भी बिदा करते है ,हर नेता इस मुगालते होते है ,वे ही एक अकेला लोकप्रिय जननेता है, मगर सच्चाई तो कुछ और होता है, जनता को आखिर यही नेताओं ने लालचीऔर स्वार्थी बनाया है ,और आज वही जनता उन्हें नाटक के एक कलाकर के रुप मे देख उनका उपयोग कर सब मजा ले रहा है।यही सच्चाई है।

Editor In Chief

डॉ मिर्जा कवर्धा 

News Desk

Editor in chief, डॉ मिर्जा कवर्धा

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