क्या हो सकता है नगर पंचायत लोहारा मे अगले हफ्ते तक अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान
घोटाले का पिटारा नगर पंचायत लोहारा

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Editor In Chief
डॉ मिर्जा के कलम से
किसी ने बड़ी कमाल की बात कही है….कि
सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं….
और मजे की बात तो ये है कि…
कुछ तालाब अपने आप को समंदर समझ बैठे है….
ये वक़्त है जनाब बदलता जरूर है और सही समय मे सही फैसला नहीं लिया गया गया तो नुकसान खुद को होना तय है।
बता दे कि विगत 6 से 7 माह से चल रहा है लोहारा नगर पंचायत मे भाजपा और कॉंग्रेस समर्थित पार्षदों के साथ नगर पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ विकास को लेकर राजनीतिक कबड्डी का खेल चल रहा है एक दूसरे के ऊपर लगा रहे है आरोप प्रत्यारोप यह बता देना लाजमी होगा कि कहीं न कहीं काम और सेटिंग को लेकर बात बन नहीं पा रहा है जिसके चलते परिषद की बैठक मे सभी का एक राय नहीं बनने के कारण नगर का विकास नहीं हो पा रहा है और इनको चुनकर जनता पछता रहीं है।
क्योंकि जिस धनुष-धारी को देखकर जनता ने वोट किया उसके सब तीर बेकार निकल गए ऊपर से एक और कर्ण आ गया जिसकी हुकूमत नगर पंचायत मे चलने लगा कभी कभी ज्यादा भरोसा भी अच्छा नहीं होता लोग अपने स्वार्थ मे अच्छे नेताओ का भी नाम खराब कर देते है पर वक्त रहते ऐसे लोगों को किनारा कर दिया जाए तो गुलशन मे फिर से बहार आ सकता है पर हम किसे समझाये ….
ये पब्लिक है साहब सब जानती है इनके खामोशी को कमजोरी न समझे क्योंकि नगर पंचायत लोहारा के घोटाले के पिटारे मे अभी बहोत से राज बंद है वक़्त आने पर वो भी खोला जाएगा इसलिए जनता का सम्मान सर्वोपरि है।