30 जुलाई से 24 अगस्त तक अमरकंटक में विधायक भावना बोहरा द्वारा कबीरधाम जिले के कांवड़ियों हेतु निःशुल्क भोजन व विश्राम की व्यवस्था

मिर्जा मल्टीमीडिया कवर्धा
भारतीय संस्कृति में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसी पावन माह में लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा कर पवित्र नदियों से जल लेकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि संयम, तपस्या, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का भी संदेश देती है। प्रतिवर्ष सावन माह में कबीरधाम जिले से भी हजारों की संख्या में कांवड़ यात्री भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धाभाव से अमरकंटक में माँ नर्मदा मंदिर तक कठिन यात्रा करते हैं। उनकी इस यात्रा को सुगम बनाने और उनकी सेवा के संकल्प के साथ पंडरिया विधायक भावना बोहरा द्वारा विगत 4 वर्षों से निरंतर अमरकंटक में उनके भोजन व विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जहाँ वे अपनी कठिन यात्रा के बाद विश्राम करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

इसी सेवा भाव को निरंतर आगे बढ़ाते हुए पंडरिया विधायक भावना बोहरा द्वारा लगातार पांचवें वर्ष अमरकंटक में कबीरधाम जिले से आने वाले कांवड़ यात्रियों के लिए निःशुल्क भोजन एवं विश्राम की व्यवस्था की गई है जहाँ भावना समाज सेवी संस्थान के सदस्यों द्वारा 30 जुलाई से 24 अगस्त तक कांवड़ यात्रियों की सेवा की जाएगी। मेला मैदान (डोम), नया नगर पालिका परिसर, अमरकंट, जिला अनूपपुर, मध्यप्रदेश में शिवभक्त कांवड़ियों हेतु भोजन, पेयजल, विश्राम स्थल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उनकी कठिन धार्मिक यात्रा अधिक सुगम और सुरक्षित बन सके। इस सेवा का लाभ लेने व किसी भी जानकारी के लिए मोबाइल नम्बर 97553-59004, 97544-62000 पर संपर्क करके प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर भावना बोहरा ने कहा कि विगत 5 वर्षों से श्रावण मास के शुभ अवसर पर कांवड़ यात्रियों की सेवा करने का हमें पुण्य अवसर मिल रहा है जो हमारे लिए सौभाग्य की बात है और यह सेवा आगे भी निरंतर जारी रहेगी। यह मेरा सौभाग्य है कि विगत वर्ष सावन माह में मुझे भी इस पुण्य यात्रा का अवसर प्राप्त हुआ जब माँ नर्मदा मंदिर अमरकंटक से मैनें और मेरे साथ सैकड़ों कांवड़ियों ने कन्धों पर जल लेकर छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि और खुशहाली के संकल्प के साथ यात्रा शुरू की और डोंगरिया महादेव से भोरमदेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर 151 किलोमीटर की यात्रा हमने पूरी की। अमरकंटक स्थित माँ नर्मदा मंदिर अमरकंटक केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का एक दिव्य केंद्र है। माँ नर्मदा का यह पावन उद्गम स्थल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है उनका पवित्र जल जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है। यही कारण है कि सावन मास में हजारों शिवभक्त अमरकंटक पहुंचकर माँ नर्मदा का पूजन-अर्चन करते हैं तथा पवित्र जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा प्रारंभ करते हैं।
उन्होंने बताया कि कांवड़ियों की आस्था का सम्मान करते हुए सात्विक भोजन और उनके विश्राम से लेकर मूलभूत व आवश्यक सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसके साथ ही यहां प्रतिदिन भोलेनाथ की भव्य महाआरती का भी अयोजन किया जाता है जहाँ हजारों की संख्या में भक्तजनों का आगमन होता है और पूरे भक्ति भाव से सभी श्रद्धालु भोलेनाथ की भक्ति में लीन रहते हैं। अमरकंटक से निकलने वाली पवित्र नर्मदा के उद्गम स्थल से जल लेकर हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जयघोष के साथ अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं। लंबी पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा करना भारतीय संस्कृति में अत्यंत पुण्य का कार्य माना गया है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए पिछले पांच वर्षों से और कबीरधाम जिले के कांवड़ यात्रियों और जनता के सहयोग एवं भावना समाज सेवी संस्थान के सदस्यों के समर्पण से यह सेवा अभियान निरंतर आगे बढ़ रही है।
भावना बोहरा ने आगे कहा कि कांवड़ यात्रा हमारी भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा है, जो श्रद्धा, अनुशासन, त्याग और समर्पण का संदेश देती है। महादेव के भक्तों की सेवा करना हमारे लिए किसी दायित्व से बढ़कर सौभाग्य और पुण्य का विषय है। जब शिवभक्त अपनी कठिन यात्रा के दौरान कुछ पल विश्राम कर संतोषपूर्वक भोजन ग्रहण करते हैं, तब यह सेवा हमारे जीवन को भी सार्थक बनाती है। हमारा प्रयास है कि कबीरधाम जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक कांवड़ यात्री को आत्मीयता, सम्मान और सहयोग का अनुभव हो। यह सेवा किसी आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक उत्तरदायित्व का निरंतर संकल्प है। हमारा प्रयास केवल सुविधाएँ उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि हर शिवभक्त को यह अनुभव कराना है कि उनकी आस्था का सम्मान करना हम सभी का नैतिक एवं सांस्कृतिक दायित्व है। सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता ही भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है और इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करते हुए निरंतर 5 वर्षों से कांवड़ यात्रियों की सेवा करने का हमें सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। हमें विश्वास है कि इस पुण्य कार्य में आप सभी का स्नेह, सहयोग और आशीर्वाद सदैव प्राप्त होता रहेगा।






